ना मरहम है तेरे हाथों में ना दिल में तेरे गुंजाइश है
फिर दुखती रग पे उंगली रख क्यों पूछ रहे हो कैसा हूँ
जब बस में नहीं कुछ भी तेरे हमदर्दी जता कर क्या होगा
अच्छा है ना पूछो हाल मेरा मुझे रहने दो मै जैसा हूँ
ज़ख्म दिए सदा अपनों ने , और गैरों ने सिर्फ कुरेदा है
इस पे भी शिकायत है उनको क्यों ऐसा या मै वैसा हूँ
कभी तू फिसला जो मेरी तरह और चोट लगी कभी मुझ जैसी
तब समझेगा नहीं मैं पत्थर मै भी इन्सा तेरे जैसा हूँ
मेरे ही गुनाह क्यों गिनता है कभी अपने पाप भी गिनती कर
तब जा के हिसाब हो पायेगा तू कैसा है मै कैसा हूँ
1 comment:
Aap naraz ho mana maine
Lekin apno ka bh dard samjh kr dekho
Pyar sab krte apse lekin
Krne ka tarika alag hai humara
Plz revert ASAP
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