फर्क है बस इतना यारा तेरे होने या ना होने में
जितना फर्क है खुलकर हंसने या जी भर के रोने में
प्यार को पाया पा कर खोया तब जाकर ये पता चला
फर्क बहुत है प्यार को अपने पाने में या खोने में
आने को नींद मुझे पत्थर की शिला पे भी आती है
लेकिन अंतर है पत्थर और गद्देदार बिछौने में
करवट बदल बदल के यूँ तो रात गुजर भी सकती है
है फर्क बताती सुबह रात भर जागने में और सोने में
साथ में तुम होते हो मेरे दिन रात ही कुछ और होते हैं
है फर्क अकेला पड़े रहने और साथ यार के सोने में
फसल उगी तो तब जाना फर्क बहुत ही गहरा है
कीकर के खुद उग आने या बगिया में आम के बोने में
जानू इतना फर्क है तेरे होने या ना होने में
है जितना जिंदा रहने या फिर जिंदा लाश को ढोने में
पर ये भी सच है जानू तुझ से प्यार इस हद तक आ पहुंचा
तेरी खुशी की खातिर मैं तैयार हूँ फिर तुझे खोने में
प्यार था तुझ से प्यार है तुझ से प्यार तुझी से रहना है
फर्क नहीं पड़ता अब तेरे होने या ना होने में