Thursday, May 28, 2026

उस बेवफा ने साथ चलना जब से छोड़ा है

तकदीर मेरा साथ अब देने लगी हरदम

तकदीर पे भरोसा करना जबसे छोड़ा है

मंजिलों का मिलना कुछ आसान हो गया

हवा ने रुख जब से मेरे विपरीत मोड़ा है

जब दौड़ में दोनों ही बाजी हारे बैठे हैं

क्या फर्क कौन तेज कौन धीरे दौड़ा है

कोई भी दर्द अब मुझे नहीं दर्द दे पाता

जब से हमदर्दों ने मेरा साथ छोड़ा है

अब खफा मुझ से कोई होता नहीं हरगिज

आइना दिखाना हमने जबसे छोड़ा है

आने लगी है घर में मेरी रोशनी बहुत

खिड़की का शीशा दुश्मनों ने जबसे तोड़ा है

रफ़्तार बढ़ गई है अब चलने की कुछ मेरे

उस बेवफा ने साथ चलना जब से छोड़ा है

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