तकदीर मेरा साथ अब देने लगी हरदम
तकदीर पे भरोसा करना जबसे छोड़ा है
मंजिलों का मिलना कुछ आसान हो गया
हवा ने रुख जब से मेरे विपरीत मोड़ा है
जब दौड़ में दोनों ही बाजी हारे बैठे हैं
क्या फर्क कौन तेज कौन धीरे दौड़ा है
कोई भी दर्द अब मुझे नहीं दर्द दे पाता
जब से हमदर्दों ने मेरा साथ छोड़ा है
अब खफा मुझ से कोई होता नहीं हरगिज
आइना दिखाना हमने जबसे छोड़ा है
आने लगी है घर में मेरी रोशनी बहुत
खिड़की का शीशा दुश्मनों ने जबसे तोड़ा है
रफ़्तार बढ़ गई है अब चलने की कुछ मेरे
उस बेवफा ने साथ चलना जब से छोड़ा है
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