Thursday, May 28, 2026

फर्क है बस इतना यारा तेरे होने या ना होने में

 फर्क है बस इतना यारा तेरे होने या ना होने में

जितना फर्क है खुलकर हंसने या जी भर के रोने में

प्यार को पाया पा कर खोया तब जाकर ये पता चला

फर्क बहुत है प्यार को अपने पाने में या खोने में

आने को नींद मुझे पत्थर की शिला पे भी आती है

लेकिन अंतर है पत्थर और गद्देदार बिछौने में

करवट बदल बदल के यूँ तो रात गुजर भी सकती है

है फर्क बताती सुबह रात भर जागने में और सोने में

साथ में तुम होते हो मेरे दिन रात ही कुछ और होते हैं

है फर्क अकेला पड़े रहने और साथ यार के सोने में

फसल उगी तो तब जाना फर्क बहुत ही गहरा है

कीकर के खुद उग आने या बगिया में आम के बोने में

जानू इतना फर्क है तेरे होने या ना होने में

है जितना जिंदा रहने या फिर जिंदा लाश को ढोने में

पर ये भी सच है जानू तुझ से प्यार इस हद तक आ पहुंचा

तेरी खुशी की खातिर मैं तैयार हूँ फिर तुझे खोने में

प्यार था तुझ से प्यार है तुझ से प्यार तुझी से रहना है

फर्क नहीं पड़ता अब तेरे होने या ना होने में

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