बूढ़ा हूँ पर बीमार नहीं मजबूर नहीं लाचार नहीं
जब तक एक सांस भी बाकी है हार मुझे स्वीकार नहीं
मरना तो सभी को एक दिन फिर मरने से काहे डरना
लेकिन जीते जी मरने सा जीने को मैं तैयार नहीं
कुछ बीज बचे हैं उम्मीदों के बो ने को कहाँ जाऊँ बोलो
ना जगह ही अच्छी मिलती है बारिश के कोई आ सार नहीं
अपनी अपनी मंजिल की तरफ सब मुझे घसीटना चाहते हैं
मेरी मंजिल तक संग मेरे कोई चलने को तैयार नहीं
पिछला इतिहास तो पढ़ने में दिलचस्पी सभी की है यारों
लिखे जो नया इतिहास किसी के पास वो अब तलवार नहीं
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