ना सही हमको किसीको तो बताया कीजे
गम छुपाने का किसे शौक है पर ये तो बता
है भला कौन यहाँ जिस पे भरोसा कीजे
लोग कहते हैं कि गम बांटो तो घट जाता है
शीशा ही नही टूटा, अक्स भी टूटा है । पत्थर किसी अपने ने बेरहमी से मारा है॥ जो जख्म है सीने पे दुश्मन ने लगाये हैं। पर पीठ में ये खंजर अपनो ने उतारा है।
जो यार के काम ना आये कभी उसे यार नही मै कह सकता
जो प्यार किताबी रह जाए उस प्यार नही मै कह सकता
सह सकता हूँ दुःख गम या तकलीफ चाहे जितनी भी हो
बस खुशी मुझे कोई दे जाए तो थोड़ी भी नही सह सकता
जुबां पे कुछ और दिल में कुछ ये रीत है दुनिया वालो की
लो तुम ही सम्भालो ये दुनिया मै तो इसमें नही रह सकता
या तो खुल के जी लेने दो या फिर महफ़िल से जाने दो
महफिल की रस्में निभाने को मैं तो जीना नहीं कह सकता
मुझको तो उड़ने के लिए आकाश भी छोटा पड़ता है
पिंजरे के पंछी की तरह मैं दायरों में नही रह सकता
प्यार वफा चाहत अपनापन जो चाहो नाम दो तुम इसको
बात सिर्फ इतनी है उस बिन दो पल भी नही रह सकता
है हिम्मत तो आ हाथ थाम नही हिम्मत तो फिर घर में बैठ
बुजदिल के हाथ में हाथ किसीका ज्यादा देर नही रह सकता
मैं ज़िंदा हूँ विपरीत दिशा बहने की ताकत रखता हूँ
मुर्दा मछली सा पानी के संग साथ साथ नहीं बह सकता
कभी खेला करते थे होली जिद्द कर के हम सबसे
पर जब से हुआ बदरंग ये जीवन छुए नही रंग तबसे
यूं तो होली खेलने अब भी साथी घर आते हैं
पर जीवन हो बदरंग तो फिर रंग कहाँ कोई भाते हैं
तुमने जानू कह कर मेरी जान ये क्या कर डाला
रंगहीन जीवन में मेरे फिर से रंग भर डाला
फिरसे जगा दी सोई उमंगे तुमने बन हमजोली
मन में हुड्द्म्ग मचा रही है इच्छाओं की टोली
तुमने हम पर रंग डाल कर तो दी है शुरुआत
देखना अब किन किन रंगो की होगी तुम पर बरसात
अंग अंग जब तक ना भीगे तब तक होगी होली
अब ना बचेगी तेरी चुनरिया अब ना बचेगी होली
डरते डरते चुटकी भर रंग इक दूजे को लगाना
मैं ना मानु इसको होली मै ठहरा दीवाना
बस माथे गुलाल का टीका ये भी हुई कोई होली
ना रंगो से रंगी चुनरिया ना ही भीगी चोली
अरे होल़ी में भी सीमाओं का क्या रखना अहसास
भूखा ही मरना ही तो फिर तोड़ना क्यों उपवास
खेलनी ही तो जम कर खेलो मस्ती भरी ये होल़ी
मातम की तरह ना मनाओ होल़ी मेरे हमजोली
होल़ी को होल़ी सा खेलो या रहने दो हमजोली
जितनी भी होनी थी होल़ी तुम संग होल़ी होल़ी
तुम पहले दोस्त बनी होती तो बात ही कुछ और होती
कुछ पहले और मिली होती तो बात ही कुछ और होती
ये सूरज पहले निकल आता मेरे दिन कुछ और हुए होते
ये चांदनी पहले खिली होती तो रात ही कुछ और होती
ता उम्र अकेले तन्हा ही मै यहाँ वहां भटका ही किया
तेरा साथ मिला होता पहले तो बात ही कुछ और होती
जीवन के इस मरुथल में सूरज तो दहकते मिले बहुत
ये बदली पहले घिरी होती तो बरसात ही कुछ और होती
अब मुंह में दांत नही बाक़ी तो चनो का बोलो क्या कीजे
ये पोटली पहले मिली होती तो बात ही कुछ और होती
धरती तो क्या ये आसमान भी हम को छोटा पड़ जाता
कुछ पहले उड़ान भरी होती तो बात ही कुछ और होती
चंद खुशियाँ तेरी झोली में भर दूँ कोशिश है अब भी मेरी
कहीं पहले मिली होत्ती तो ये सौगात ही कुछ और होती
किस किस बात की बात करूं बस इतनी बात समझ लीजे
कुछ पहले बात हुई होती तो हर बात ही कुछ और होती
अब तक तो दर्पण टूटा था कोई अक्स भी आज तो तोड़ गया
पहले छूटे रिश्ते नाते लेकिन इक साया साथ में था
जाने कहाँ हम से चूक हुई साया भी साथ को छोड़ गया
पहले भी जख्म मिले हैं बहुत पर वक्त ने उनको भर डाला
नासूर से भी ज्यादा गहरा कोई जख्म वो दिल पे छोड़ गया
वो पल पल हमे आजमाता रहा हम प्यार समझते चले गये
आजमाईश ही अजमाइश में वो दिल का शीशा तोड़ गया
लगता था खुशियाँ ही खुशियाँ दामन में भर देगा
वो जान से प्यारा यार मेरा मेरी आँख में आंसू छोड़ गया
बेखबर से थामे हाथ उसका हम चलते गये चलते ही गये
अब जाऊं कहाँ कुछ सूझे ना ऐसे मोड़ पे वो हमे छोड़ गया
सब से सुन्दर फूल है जो इस दुनिया के गुलशन का
अर्थी पे वो आके चढ़े ये तो कोई अच्छी बात नही
वो कोहीनूर का हीरा है किसी ताज पे ही शोभा देगा
फकीर की झोली पड़ा रहे ये तो कोई अच्छी बात नही
रानी महारानी बनने का अधिकार जिसे कुदरत ने दिया
महलों की जगह खंडहर में रहे ये तो कोई अच्छी बात नही
वो परी है तो फिर अपने लिए क्यों नही फरिश्ता ढूँढती है
नाचीज से जोड़ रही रिश्ता ये तो कोई अच्छी बात नही
वो भोर की पहली किरण है तो मैं सांझ का हूँ ढलता सूरज
कुछ पल भी साथ नही मुमकिन ता उम्र दे सकता साथ नही
कोई मेरे यार को समझाओ मेरी वो समझता बात नही
जिस रात की सुबह होती है मै वो किस्मत की रात नही
ऐ मेरे खुदा इतना भी ना दे जितनी मेरी औकात नही
लंगूर के हाथ में हूर लगे ये तो कोई अच्छी बात नही
इससे तो अच्छा था नश्तर ही चुभा जाता कोई
मरहम लगाये बिन अगर जाना था वापिस यार को
बीमार जानता है जब कि मर्ज़ लाइलाज है
बेकार है झूठी तसल्ली देना फिर बीमार को
गर जीता जाए दिल किसीका हार कर अपना अहम
जीत से बेहतर समझ लो ऎसी हसीं हार को
माझी ही चाहता ना था कि पार पहुंचाए हमें
छोड़ गया था कीनारे पर ही वो पतवार को
हम किनारे पर भी होते तो भी डूबते सनम
बेवजह मुजरिम ना ठहरा माझी या मझधार को
जख्मो को सहलाता ना तो भी कोई ग़म ना था
और तो जख्मी ना करता जालिम मेरे प्यार को
साथ छोड़ने की बात करता था यार बार बार
हमने कहा आमीन और दिया छोड़ इस संसार को
रिहते टूटें साथी छूटे लेकिन तूं आंखें नम ना कर
पतझड़ के मौसम में अक्सर पेड़ से पत्ते झड़ जाते है
अपनी धुन में मस्त रहे हो नहीं सुनी कोई बात किसी की
अपनी तरह से जीने वाले यूं ही अकेले पड़ जाते हैं
ये देख के तुफाँ के आगे कभी टिक पाना आसान नहीं
घास तो अक्सर झुक जाता है पेड़ हमेशा अड़ जाते हैं
जिद्द छोडो तो बेहतर है , है वक्त संभलने का अब भी
तेज तुफाँ में अड़ने वाले अक्सर जड़ से उखड़ जाते की
माना तुम खिलाड़ी हो पक्के पर ये चौसर का खेल नहीं
इस जीवन में पड़ते पड़ते कई पासे उलटे पड़ जाते हैंकिस कद्र तकलीफ दी है जिन्दगी तूने मुझे
अब तो तेरे नाम से होने लगी नफरत मुझे
पहले तेरे बिन कभी कोई मुझे भाता न था
अब तुझ से दूर जाने की होने लगी चाहत मुझे
आज तेरी नजरो में मेरी कोई कीमत नहीं
कल बहुत महसूस होगी मेरी जरूरत तुझे
पर मुझे अफसोस है तब मैं ना लौट पाऊंगा
सौत की बाहों में जो इक बार चला जाऊंगा
तुमने तो ठुकरा दिया तनहा किया भुला दिया
पर देख लेना वो मुझे हरगिज नहीं ठुकराएगी
तुमने साथ ना दिया तो ना सही मर्जी तेरी
सौत तेरी बावफा है साथ लेकर जायेगी
सौतन के इन्तजार की तारीफ कर सके तो कर
जिस भी पल तूम छोड़ देगी वो मुझे अपनायेगी
छीनने की उसने कोशिश इसलिए ही की नहीं
जानती थी एक दिन तूं खुद उसे दे जायेगी
सौत तेरी हो तो हो पर मेरी महबूबा है वो
मैं भी खुशी से चलूँगा जब वो लेने आयेगी
दर्द तन्हाई का शायद तब तुझे महसूस हो
मैं चला जौउगा जब और तनहा तूं रह जायेगी
तूं सात फेरे में भी अपना बन सकी ना बना सकी
वो एक फेरे में ही मेरी जान तक ले जायेगी
मौत मेरी सौत तेरी बन के जब आ जायेगी
देख लेना उस घड़ी तूं बहुत पछताएगी
किस कद्र तकलीफ दी है जिन्दगी तूने मुझे
अब तो तेरे नाम से होने लगी नफरत मुझे
पहले तेरे बिन कभी कोई मुझे भाता न था
अब तुझ से दूर जाने की होने लगी चाहत मुझे
आज तेरी नजरो में मेरी कोई कीमत नहीं
कल बहुत महसूस होगी मेरी जरूरत तुझे
पर मुझे अफसोस है तब मई ना लौट पाऊंगा
सौत की बाहों में जो इक बार चला जाऊंगा
तुमने तो ठुकरा दिया तनहा किया भुला दिया
पर देख लेना वो मुझे हरगिज नहीं ठुकराएगी
तुमने साथ ना दिया तो ना सही मर्जी तेरी
सौत तेरी बावफा है साथ लेकर जायेगी
सौतन के इन्तजार की तारीफ कर सके तो कर
जिस भी पल tuu छोड़ देगी वो मुझे apanaayegii
छीनने की उसने कोशिश इसलिए ही की नहीं
जानती थी एक दिन तूं खुद उसे दे जायेगी
सौत तेरी हो तो हो pr मेरी महबूबा है वो
मैं खुशी से चल प्दुम्गा जब वो लेने आयेगी
दर्द तन्हाई का शायद का तब तुझे महसूस हो
मई चला जौउगा जब और तनहा टू रह जायेगी
टू सात फेरे में भी अपना बन सकी ना बना सकी
वो एक फेरे में ही मेरी jaan tak le जायेगी
maut मेरी सौत तेरी बन के जब aa जायेगी
देख लेना उस घड़ी तूं बहुत पछताएगी