Sunday, February 21, 2010

अब तक तो दर्पण टूटा था कोई अक्स भी आज तो तोड़ गया

अब तक तो दर्पण टूटा था कोई अक्स भी आज तो तोड़ गया

पहले छूटे रिश्ते नाते लेकिन इक साया साथ में था

जाने कहाँ हम से चूक हुई साया भी साथ को छोड़ गया

पहले भी जख्म मिले हैं बहुत पर वक्त ने उनको भर डाला

नासूर से भी ज्यादा गहरा कोई जख्म वो दिल पे छोड़ गया

वो पल पल हमे आजमाता रहा हम प्यार समझते चले गये

आजमाईश ही अजमाइश में वो दिल का शीशा तोड़ गया

लगता था खुशियाँ ही खुशियाँ दामन में भर देगा

वो जान से प्यारा यार मेरा मेरी आँख में आंसू छोड़ गया

बेखबर से थामे हाथ उसका हम चलते गये चलते ही गये

अब जाऊं कहाँ कुछ सूझे ना ऐसे मोड़ पे वो हमे छोड़ गया

1 comment:

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!