वो अपनी राह में चली गयी मै अपनी राह पे चता गया
शीशा ही नही टूटा, अक्स भी टूटा है । पत्थर किसी अपने ने बेरहमी से मारा है॥ जो जख्म है सीने पे दुश्मन ने लगाये हैं। पर पीठ में ये खंजर अपनो ने उतारा है।
Saturday, February 20, 2010
वो मेरे करीब इतना आई मै समझा सब कुछ सुलझ गया
वो अपनी राह में चली गयी मै अपनी राह पे चता गया
Friday, February 19, 2010
मेरे यार सा सच्चा यार बड़ी किस्मत वालो को मिलता है
हर पल या तुम संग बीतता है या तेरी याद में कटता है
किस हद तक दिल में समाये हो इसका तुमको एहसास नही
दिल जितनी बार धडकता है तेरे नाम की माला जपता है
Sunday, February 14, 2010
ऐ मेरे खुदा इतना भी ना दे जितनी मेरी औकात नही
सब से सुन्दर फूल है जो इस दुनिया के गुलशन का
अर्थी पे वो आके चढ़े ये तो कोई अच्छी बात नही
वो कोहीनूर का हीरा है किसी ताज पे ही शोभा देगा
फकीर की झोली पड़ा रहे ये तो कोई अच्छी बात नही
रानी महारानी बनने का अधिकार जिसे कुदरत ने दिया
महलों की जगह खंडहर में रहे ये तो कोई अच्छी बात नही
वो परी है तो फिर अपने लिए क्यों नही फरिश्ता ढूँढती है
नाचीज से जोड़ रही रिश्ता ये तो कोई अच्छी बात नही
वो भोर की पहली किरण है तो मैं सांझ का हूँ ढलता सूरज
कुछ पल भी साथ नही मुमकिन ता उम्र दे सकता साथ नही
कोई मेरे यार को समझाओ मेरी वो समझता बात नही
जिस रात की सुबह होती है मै वो किस्मत की रात नही
ऐ मेरे खुदा इतना भी ना दे जितनी मेरी औकात नही
लंगूर के हाथ में हूर लगे ये तो कोई अच्छी बात नही