पता नही क्यों
जम जाते है स्वर नली मे वो सारे शब्द
जिन्हे रात भर अपने प्यार की गर्मी से
रखता हूँ गर्म ताकि उगल सकूँ उन्हे ज्यों का त्यों
अगर और कुछ ना भी कह सकूँ तुम से
जब तुम मिलो सुबह रेलवे फाटक के उस पार
कालिज जाते हुये
पता नही क्यों खडा रह्ता हूँ जडवत
घन्टो तुम्हारे इन्त्जार मे
सारी शक्ति कहाँ खो जाती है
शरीर क्यों हो जाता हैं निढाल
ठीक उस क्षण जब तुम आने ही वाली होती हो
लगता है कमजोर पड रही है पाँव तले की जमीन
और मै अकस्मात चल पडता हूँ वहाँ से
बिना तुम्हे मिले बस ये सोच कर
कि कल फिर एक बार करूँगा कोशिश
वहाँ पर टिके रहने की
उन जमे हुये शब्दो को बाहर निकाल कहने की
पता नही क्यों
मुझे पता है नहीं होगा कल
कुछ भी आज से ज्यादा
कोई अर्थ नही रखता मेरा
आज का पक्का इरादा
फिर तुम ही क्यों नही समझ जाती
जो नही कहा है मैने
या क्यों नही अपने प्यार की गर्मी मिला देती मेरे प्यार की गर्मी मे
तकि उस गर्मी से पिघल सके वो शब्द
जो जम जाते है जब भी तुम सामने होती हो
काश तुम ही समझ जाती "वो"
जो नही कहा है मैने
जम जाते है स्वर नली मे वो सारे शब्द
जिन्हे रात भर अपने प्यार की गर्मी से
रखता हूँ गर्म ताकि उगल सकूँ उन्हे ज्यों का त्यों
अगर और कुछ ना भी कह सकूँ तुम से
जब तुम मिलो सुबह रेलवे फाटक के उस पार
कालिज जाते हुये
पता नही क्यों खडा रह्ता हूँ जडवत
घन्टो तुम्हारे इन्त्जार मे
सारी शक्ति कहाँ खो जाती है
शरीर क्यों हो जाता हैं निढाल
ठीक उस क्षण जब तुम आने ही वाली होती हो
लगता है कमजोर पड रही है पाँव तले की जमीन
और मै अकस्मात चल पडता हूँ वहाँ से
बिना तुम्हे मिले बस ये सोच कर
कि कल फिर एक बार करूँगा कोशिश
वहाँ पर टिके रहने की
उन जमे हुये शब्दो को बाहर निकाल कहने की
पता नही क्यों
मुझे पता है नहीं होगा कल
कुछ भी आज से ज्यादा
कोई अर्थ नही रखता मेरा
आज का पक्का इरादा
फिर तुम ही क्यों नही समझ जाती
जो नही कहा है मैने
या क्यों नही अपने प्यार की गर्मी मिला देती मेरे प्यार की गर्मी मे
तकि उस गर्मी से पिघल सके वो शब्द
जो जम जाते है जब भी तुम सामने होती हो
काश तुम ही समझ जाती "वो"
जो नही कहा है मैने