Thursday, October 10, 2013

मौत की नजरों में गुनह्गार हुए फिरते हैं

जिन्दा है पर जिन्दगी बेज़ार किये फिरते है
मौत से बस जिन्दगी उधार लिये फिरते  है

चुकता उधार करने से बेवजह ही  बचते रहे
खामख्वाह हम खुद को शर्मसार किये फिरते हैं

 कर्जदार की तरह साहुकार से बचते रहे
मौत की नजरों में  गुनह्गार हुए फिरते हैं

उधार की थी जिन्दगी फिजूल खर्च होती रही
बेवजह ही खुद को कर्जदार किये फिरते हैं

जब दिल मे गुंजाइश नही  कि प्यार मे कुछ खो सकें
किस लिये  फिर दुनिया भर से प्यार किये फिरते हैं

2 comments:

samiksha malhotra said...

DEAR Sir aap ki ye line bhohut achhi hai.
sir pls contact me from samiksha

My Spicy Stories said...

Ek Achhi Kahani Ka Prastutikaran Aapke Dwara. Thank You For Sharing.
प्यार की स्टोरी हिंदी में