Thursday, April 17, 2008

तुम तो नजरे छोड़ सीधे दिल मे ही उतर गयी

तुम में कुछ तो बात है जो तुझ मे दिल अटक गया
 अब तक कभी ना भटका जाने आज क्यों भटक गया
तेरे बारे में ही अब ये सोचता दिन रात है
तुम में कुछ तो बात है
 और भी देखे हैं सुन्दर और भी देखे जवाँ
 मेरी नजरो में मगर कोई खरा उतरा कहाँ
 पर तुम तो नजरे छोड़ सीधे दिल में ही उतर गयी
 शायद दिल ने दिल से कर ली सीधे कोई बात है
तुम में कुछ तो बात है
 तुम मिली क्या जिन्दगी का रुख ही जैसे मुड़ गया
 गम से नाता टूट के खुशियों से जाके जुड़ गया
 आँसुओं की अब कभी होती नही बरसात है
 तुम मे कुछ तो बात है

8 comments:

rakhshanda said...

aap mein bhi kuchh to baat hai...beautiful..

बाल किशन said...

अद्भुत भावों की गजल है
भाषा भी उत्तम सजल है
गजलगो ने लिख दिया जो
दिल के ही जज्बात हैं
आपको है शुक्रिया और
आनंद की बरसात है

तुझमे कोई बात है

Krishan lal "krishan" said...

बाल किशन जी
पहले तो आप ये बताईये कि इतने दिन कहाँ रहे। आशा है आप स्वस्थ एव प्रस्न्नचित रहे होगे
आप जैसे मित्रों का इन्तजार रहता है आप ये ना भूला कीजिये
रचना को पसन्द करने के लिये धन्यवाद

Krishan lal "krishan" said...

Rakshanda ji
मै तो गुजरे वक्त का टूटा हुआ टुकड़ा हूँ इक
और मुझे मालूम है अब मेरी क्या औकात है
जुबाँ पे लाने के लिये मजबूर यूँ ना कीजिये
कह ना बैठे हम कहीं दिल मे जो जज्बात है
हो सके दर्पण कभी जरा बन संवर के देखिये
खुद देखना हम मे नही हजूर आप मे कुछ बात है
तुम में कुछ तो बात है

रचना पसन्द करने के लिये धन्यवाद

Udan Tashtari said...

बेहतरीन जनाब!! बहुत खूब!

Krishan lal "krishan" said...

udan tashtri ji
तुमने कहा है "खूब" तो इसमें जरूर कोई बात है
क्योंकि मै जानता हूँ तुम मे कुछ तो बात है

श्रीमान जी इतना इन्त्जार ना करवाया कीजिये

अल्पना वर्मा said...

wah ! wah!!wah!!!!
bahut sundar bhaav...

Krishan lal "krishan" said...

अल्प्ना वर्मा जी
आपके इन तीन शब्दो मे व्यक्त प्रशंसा का मै आभार और अपनी खुशी हजारों शब्दो मे भी नही कर सकता । इस लिये मात्र इतना कह सकता हूँ
आप मेरे जज्बात को समझ सकी उन्हे अनुभव कर सकी ये मेरी खुशनसीबी है और आभार मे केवल ईश्वर से प्रार्थना कर सकता हूँ वो आप्के जीवन में सदैव खुशियो का अम्बार लगाये रखे