Monday, July 27, 2009

वो कहेगा कब कहेगा इसका ना इंतजार कर


प्यार में दर्द का अहसास ही कब होता है
प्यार जब आधा अधूरा हो ये तब होता है

दर्द जब हद में रहे तब ये रूलाता है बहुत
दर्द जब हद से गुजर जाये दवा होता है

प्यार तड़पाता,रुलाता है,सताता है बहुत
प्यार जो अपने ही दायरों मे घिरा होता है

प्यार जब हद से गुजर जाये तो फिर क्या कहना
प्यार में सारे जमाने का मजा होता है

प्यार में रोने रूलाने का चलन है तब तक
जब ये अपनी ही जंजीरो मे बंधा होता है

अपने संस्कारो की जंजीरे जरा तोड़ के देख
अपने दायरों से निकल अहम जरा छोड़ के देख

प्यार करते हो तो सरेआम कहो करते हैं
यार से साफ कहो तुम पे बहुत मरते हैं

अपना कोई अहम तूं आड़े ना आने दे कभी
प्यार को रूठ के  दूर ना  जाने दे कभी

खा कसम डर या वहम दिल मे नहीं आयेगा
तूँ जरा  आगे तो बढ़  पीछे जहाँ हट जायेगा

हाँ ये हो सकता है  कुछ चर्चे रहें दो चार दिन
तूँ बता कि इससे ज्यादा और क्या हो जायेगा

थोडी ताकत थोड़ी सी हिम्मत जुटानी है तुम्हें
प्यार तेरी सारी दुनियां को रगीन  कर जायेगा

वो कहेगा कब कहेगा इसका ना इंतजार कर
तुम कहोगे पहले तो इसमें तेरा क्या जायेगा

तेरे दामन के पकड़ने में ही दिखती ढील है
वरना क्या हिम्मत जो वो दामन छुड़ा ले जायेगा

3 comments:

अनिल कान्त : said...

क्या खूब लिखा है आपने ...

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

Udan Tashtari said...

बहुत बेहतरीन रचना!

Krishan lal "krishan" said...

Sameer ji aur anil ji bahut bahut shukriya rachna ko pasand karne ke liye.