Friday, February 25, 2011

क्यों होता है ऐसा ऐसा क्यों होता है

क्यों होता है ऐसा
 ऐसा क्यों होता है
 
 जरा सा देकर चाहते हैं एहसान बड़ा हो जाए
 चंद ईंटो और पत्थर से कोई ताज खडा हो जाए
 
 महबूब मिले कोई ऐसा जो हम पे प्यार लुटाये
 दोस्त मिले तो ऐसा जो हम पे जान दे जाए
 
 हींग लगे ना फिटकरी और रंग भी आये चोखा
 मेरी मानो ऎसी सोच है खुद को देना धोखा
 
 जितना गुड डालोगे उतना ही तो मीठा होगा
ऐसा ही होता आया है सदा ही ऐसा होगा
 
जाने क्यों फिर फिर भी हर कोई गधा ढूंढता ऐसा
जो वजन तो पूरा ढोए लेकिन घास जरा ना  खाये

 क्यों होता है ऐसा
 ऐसा क्यों होता है

1 comment:

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

जरा सा देकर चाहते हैं एहसान बड़ा हो जाए
चंद ईंटो और पत्थरों से कोई ताज खडा हो जाए

आज के दौर की मानसिकता को बखूबी बयां किया आपने....