चोट कोई दिल पे लग जाये या जख्मी जिस्म हो
दर्द दोनों में ही लाजिम है बेशक अलग अलग
चाह कर भी हम उसे इस हद तक कभी ना चाह सके
उसकी भी थी हद अलग कुछ मेरी भी थी हद अलग
क्यों मेरी जरूरत को समझा है ना समझेगा कोई
सारे हैं मुझसे अलग या फिर हूँ मै सबसे अलग
जो भी दे सकता था मैंने यार को सब कुछ दिया
ये और बात है कि थी कुछ उसकी जरुरत अलग
किस तरह और कब तलक वो साथ दे पाता मेरा
उसकी थी चाहत अलग कुछ मेरी भी चाहत अलग
ये भी हुई कोई दोस्ती और ये भी कोई प्यार है
किया यार को भी शर्मसार हुए खुद भी शर्मिंदा अलग
कर के फरमाइश बता हम को क्या हासिल हुआ
जब भी मिली ना ही मिली. शर्मिंदगी हुई, सो अलग
इक छत के नीचे अजनबी बन के रहने से बता
बेहतर नही क्या दोनो ही खुश रहें अलग अलग
बेहतर नही क्या दोनो ही खुश रहें अलग अलग
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