Tuesday, November 30, 2010

वफा के नाम पे अब कुछ नही होता हासिल

आप कहते हो कि गम को ना छुपाया कीजे
ना सही हमको किसीको तो बताया कीजे

गम छुपाने का किसे शौक है पर ये तो बता
 है भला कौन यहाँ जिस पे भरोसा कीजे

 लोग कहते हैं कि गम बांटो तो घट जाता है
 वो गलत कहते हैं जब चाहो ये अजमा लीजे

हैं तमाशाई सभी कोई मददगार नहीं
बताके गम का तमाशा ना बनाया कीजे

दर्दे मरीज करहाता रहा करहाता रहा
देखने वाले रहे कहते कि धीरज कीजे

ये जो हमदर्दी है नाटक है दिखावा है सिर्फ
अपना बोझ अपने ही कंधो पे उठाया कीजे

प्यार का नाम है बस नाम है इस दुनिया में
प्यार व्यापार नही जो सोच समझ कर कीजे

वफ़ा के नाम पे अब कुछ नही होता हासिल
बेवफाई ना करे कोई तो फिर क्या कीजे

बाद मरने के भी क्यों  बोझ किसी पे बनना
अपनी लाश अपने ही कन्धो पे उठा भी लीजे

सिवा सलाह यहाँ किसने किसी को क्या दिया
 मदद के वास्ते झोली ना फैलाया कीजे

1 comment:

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

दिल का दर्द कागज़ पे उतारा, धन्‍यवाद.