Monday, May 26, 2008

अब देखिये अन्जाम क्या होगा हमारी वफाओं का

मन्जिल ना थी नसीब मे तो मिलती किस तरह
मन्जिल कभी बदल गयी रस्ते कभी बदल गये
 मन्जिल ही नही ठीक या फिर रास्ते ही गलत है
 हम अकेले रह गये जिस राह को भी निकल गये
 शायद मेरी रफतार मे ही कुछ अजीब बात है
 कुछ तो पीछे रह गये कुछ लोग आगे निकल गये
 जिससे थी उम्मीद कि कुछ दूर संग चलेगा वो
 पहला मोड़ आया तो वो रास्ता ही बदल गये
 इल्जाम बेवफाई का बेशक मेरे सिर धर दिया
 सच ये है कि मुझ से पहले खुद ही वो बदल गये
 सुना हैं उस के दर पे फिसलन इस कदर मौजूद है
 जितने गये दर खुलने से पहले ही पहले फिसल गये
 अब देखिये अन्जाम क्या होगा हमारी वफाओं का
 आज तक तो गये जहाँ हम गिरते गिरते संभल गये

2 comments:

Krishan Arya said...

Dear Krishan ji,

For the first time I was on your blog by chance, it is is wonderful collection and full of creativity.
I appreciate your creation.

Keep it up. Cheers !!!
Regards: Krishan Arya

Krishan lal "krishan" said...

Krishan arya ji
thanks for visiting the blog. First time we usually meet by chance second time by design . I hope you will visit second time as well. Thanks again.