Thursday, April 30, 2009

मौत मेरी हादसा या खु्दकशी हरगिज नही
कत्ल है बस आपको कातिल नजर आता नही
 इस तरह से यार मेरा कत्ल मेरा कर गया
 यू लगा जैसे मै अपनी आयी मौत मर गया
बेवजह सब लोग जाने मौत से डरते है क्यों
 मै तो अपनी जिन्दगी का चेहरा देख के डर गया
 सांसो के सिवा जिन्दगी ने जिन्दगी भर क्या दिया
 लो आज़ उसका ये भी कर्ज़ हमने वापिस कर दिया
 दूजो का दर्द बाँटने की ये भी क्या आदत हुई
इक इक कर झोली में अपनी दर्द ही दर्द भर लिया
कशमक्श मे यार को देखा तो हमने ये किया
खुद ही अपना सर खन्जर पे जाके धर दिया

2 comments:

श्यामल सुमन said...

मौत मेरी हादसा या खु्दकशी हरगिज नही
कत्ल है बस आपको कातिल नजर आता नही

बहुत खूब। कहते हैं कि-

मेरे कातिल मुझे कुछ और अता फरमा दे।
जख्म की बात न कर जख्म तो भर जाते हैं।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

Udan Tashtari said...

बहुत खूब!!